इस सरकारी स्कीम में जमा करें 1000 रूपए और पाएं 3.7 लाख रूपए

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मुंबई: आप कम पैसे के निवेश में ज्यादा मुनाफा कमाना चाहते हैं तो यह स्कीम आपके लिए है। यह न केवल सुरक्षित स्कीम है, बल्कि यह आपको अच्छा रिटर्न भी देती है। इस पोस्ट में पढ़ें पीपीएफ से जुड़ी तमाम जानकारियां।

क्या है पीपीएफ

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पब्लिक प्रोविडेंट फंड (पीपीएफ) सेविंग्स व टैक्स में बचत करने वाली सरकारी स्कीम है। इसे वित्त मंत्रालय के नेशनल सेविंग्स इंस्टीट्यूट ने वर्ष 1968 में लॉन्च किया था। यह स्कीम आज भी सफल है और अच्छी चल रही है।

कौन कर सकता है निवेश
पीपीएफ अकाउंट किसी भी समय किसी भी उम्र में खोला जा सकता है। यह अकाउंट पोस्ट ऑफिस, एसबीआई बैंक या अन्य किसी भी बैंक के साथ खोला जा सकता है। यह अकाउंट एकल, जॉइंट, माइनर के लिए माता-पिता या हिंदू अनडिवाइडेड फैमिली (एचयूएफ) खोल सकती है। नॉन रेसिडेंट इंडियंस (एनआरआई) को यह खाता खोलने का अधिकार नहीं है। आप चाहें तो पीपीएफ अकाउंट ऑनलाइन भी खुलवा सकते हैं।

न्यूनतम व अधिकतम निवेश
पीपीएफ में न्यूनतम निवेश 500 रूपए प्रति वर्ष यानी कि करीब 42 रूपए प्रति माह है, जबकि अधिकतम इस खाते में 150000 रूपए प्रति वर्ष डाला जा सकता है। यह रकम साल में एक बार एक साथ या फिर साल भर की 12 किश्तों में यानी कि मासिक किश्त के रूप में जमा की जा सकती है।

इतना मिलेगा फायदा
इस स्कीम पर पर 15 साल में 8.8 फीसदी तक का रिटर्न मिलता है। यानी कि अगर आप प्रति माह 1000 रूपए जमा करते हैं तो 15 साल बाद आपको 374071 रूपए मिलते हैं। इसमें आपकी ओर से जमा की गई राशि (1000*12= 12000; 12000*15) 180000 रूपए होती है। इसका मतलब आपको 194017 रूपए का फायदा मिलता है। इसी तरह 150000 रूपए प्रति वर्ष जमा करने वाले को 15 वर्ष बाद 46,75,910 रूपए मिलते हैं।

ब्याज दर
पहले पीपीएफ अकाउंट पर 15 वर्षो के लिए ब्याज दर फिक्स था। दिसंबर 2011 के बाद इस पर ब्याज दर को 10 वर्षीय सरकारी बॉन्ड्स से लिंक कर दिया गया। इसका अर्थ है पीपीएफ पर हर साल अलग ब्याज दर मिलता है। वर्ष 2014 में इस पर 8.7 प्रतिशत की दर से ब्याज चुकाया गया। वर्ष 2015 के लिए भी ब्याज दर यही है। ब्याज साल में एक बार 31 मार्च को जोड़ा जाता है।

टैक्स में छूट
पब्लिक प्रोविडेंट फंड का सबसे बड़ा फायदा है टैक्स में मिलने वाली छूट। इस स्कीम पर इनकम टैक्स एक्ट की धारा 80सी के तहत टैक्स में छूट मिलती है। वहीं इस स्कीम के तहत कमाया गया ब्याज टैक्स फ्री होता है। यानी कि कमाए गए ब्याज पर कोई टैक्स नहीं चुकाना पड़ता।

फायदे
– इस स्कीम का मैच्यॉरिटी पीरियड 15 वर्ष होता है। मैच्यॉरिटी के बाद अगर इस स्कीम को बढ़ाना चाहें तो 5-5 साल के लिए बढ़ाया जा सकता है।
– खाता खोलने की तारीख से सातवे वित्तीय वर्ष से आप चाहें तो इस खाते में से पैसा निकाल सकते हैं। इस खाते में से 50 प्रतिशत तक पैसा निकालने की छूट होती है।
– मैच्यॉरिटी के वक्त खाताधारक को 3 विकल्प दिए जाते हैं –
कंप्लीट विड्रॉल – इसके तहत खाता धारक 58 वर्ष की आयु तक 75 फीसदी रकम निकाल पाता है, बची हुई रकम इसके बाद निकाला जा सकता है।
एक्स्टेंड पीपीएफ विद नो कॉन्ट्रीब्यूशन – इसके तहत मैच्यॉरिटी के बाद पीपीएफ खाते की अवधि को और बढ़ा लिया जाता है, लेकिन अब खाता धारक को कोई और पैसा जमा नहीं करना होता। इस स्थिति में एक वित्तीय वर्श में एक बार कुछ पैसा निकाला जा सकता है, जबकि बचे हुए पैसे पर ब्याज मिलता रहता है।
एक्स्टेंड पीपीएफ विद कॉन्ट्रीब्यूशन – इसके तहत पीपीएफ अकाउंट की अवधि बढ़ाई जाती है और फिर वह पहले की ही तरह इस खाते में हर साल या हर माह पैसे डालता रहता है। इस स्थिति में वह 5 साल में पीपीएफ खाते की केवल 60 प्रतिशत रकम ही निकाल सकता है। साल में एक ही बार पैसा निकाले की इजाजत मिलती है।

सुरक्षित निवेश
सरकारी होने के कारण पब्लिक प्रोविडेंट फंड में निवेश करना बेहद सुरक्षित है और आपके पैसे डूबने का कोई खतरा नहीं है। सुरक्षा के साथ ही आपको इसमें अच्छे रिटर्न भी मिलते हैं। इस लिहाज से यह निवेश का अच्छा विकल्प हो सकता है।

लोन सुविधा
पीपीएफ खाते को 3 साल पूरे होने के बाद इस पर लोन लिया जा सकता है। पहला लोन पीपीएफ खाते में जमा रकम का 25 फीसदी तक ही मिलता है। लोन की रकम पर पीपीएफ में मिलने वाली ब्याज दर से 2 फीसदी ज्यादा की दर से ब्याज चुकाना पड़ता है।

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